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दो अधूरेपन, एक पूरा परिवार

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नमस्ते! जयचंद्र मेहता (  Instagram  ) जी द्वारा लिखी गई कहानी  " दो अधूरेपन, एक पूरा परिवार "  को साझा करने जा रहा हूँ।  ग हराती शाम का धुंधलका ‘AG Life Care Foundation’ के बरामदे में फैल रहा था। अनुज मेहता जी ने अपना शॉल को और कसकर लपेट लिया। बारिश की बूँदें बाहर लॉन में बेतरतीब ढंग से गिर रही थीं, बिल्कुल वैसे ही जैसे उनकी यादें। ठीक बगल में ओमप्रकाश जी कैरम बोर्ड पर अकेले ही गोटियाँ सजा रहे थे, खुद से ही झुँझलाते हुए। "कोई खेलने वाला ही नहीं है," वह बुदबुदाए। अनुज मेहता जी ने सूनी आँखों से उन्हें देखा। "खेलने वाले तो बहुत हैं, ओमप्रकाश जी। बस कोई 'अपना' नहीं है।" इस बातचीत के ठीक पाँच किलोमीटर दूर, 'BH Life Growth Foundation' में आठ साल का पारस अपनी ड्राइंग बुक पर झुका हुआ था। वह एक घर का चित्र बना रहा था। घर में चार लोग थे, लेकिन उसने किसी का चेहरा नहीं बनाया था। 'BH Life Growth Foundation' की केयरटेकर, गिरिजा मेहता ने उसके कंधे पर हाथ रखा। पारस ने चौंककर ऊपर देखा और जल्दी से ड्राइंग बुक बंद कर दी। "चेहरे क्यों नहीं बनाए, ...