एक खामोश सफर
नमस्ते! जयचंद्र मेहता ( Instagram ) जी द्वारा लिखी गई कहानी " एक खामोश सफर " को साझा करने जा रहा हूँ। एक खामोश सफर प्रे मचंद मेहता एक ऐसे इंसान थे जिनका पूरा जीवन दूसरों की भलाई के लिए समर्पित था। वह उन अनगिनत लोगों के जीवन में एक खामोश स्तंभ की तरह थे, जो चुपचाप सबका भार उठाते थे, चाहे वह परिवार हो, दोस्त हों, सहकर्मी हों, या फिर रिश्तेदार। उनका स्वभाव ही "हाँ" कहना था। वह किसी को "ना" नहीं कह पाते थे। "हाँ, मैं तुम्हें पैसे उधार दे दूँगा, चिंता मत करो।" "हाँ, मैं आज देर तक रुक कर तुम्हारा काम पूरा करने में मदद कर दूँगा।" "हाँ, मैं तुम्हारे साथ बैठ सकता हूँ, भले ही हम कुछ बात न करें।" "हाँ, मैं तुम्हारे लिए बात करूँगा, तुम चिंता मत करो।" उनके दिन काम के मैराथन जैसे थे, लेकिन वह हर काम को पूरी ईमानदारी और दिल से करते थे। उन्हें बदले में किसी तारीफ या "धन्यवाद" की उम्मीद नहीं थी। उन्हें बस किसी के चेहरे पर आई राहत की एक झलक, या किसी के कंधों से उतरा हुआ बोझ देख लेना ही काफी था। उन्हें उपयोगी होने में ए...