ज़िंदगी "माँ" जैसी
नमस्ते!
जयचंद्र मेहता ( Instagram ) जी द्वारा लिखी गई कहानी " ज़िन्दगी माँ जैसी " को साझा करने जा रहा हूँ।
जयचंद्र मेहता ने जो संदेश दिया है, वह बहुत ही विनम्र और दिल से लिखा हुआ है:
ज़िंदगी माँ जैसी
एक ही ट्रेन के अलग-अलग डिब्बों में तीन मुसाफिर सफर कर रहे थे, अपनी-अपनी मंजिल की ओर। तीनों की दुनिया एक दूसरे से बिल्कुल जुदा थी, फिर भी एक अनकहा धागा उन्हें जोड़े हुए था।
पहले डिब्बे में जयचंद्र था, एक नौजवान कॉर्पोरेट एक्जीक्यूटिव।
उसका लैपटॉप खुला था, और उंगलियाँ कीबोर्ड पर दौड़ रही थीं। बगल में रखे महंगे फोन की स्क्रीन बार-बार चमक उठती थी। उसकी दुनिया थी - डेडलाइन, टारगेट, और प्रमोशन की दौड़। उसकी ज़िंदगी तनाव भरी थी, अक्सर उसे परिवार के लिए वक्त नहीं मिलता था, लेकिन जब भी वह अपनी चमचमाती गाड़ी, शहर के सबसे पॉश इलाके में अपने आलीशान फ्लैट और अपने बैंक बैलेंस को देखता, तो एक सुकून की सांस भरता। उसे लगता, यही तो है सबसे अच्छी ज़िंदगी! चुनौतियों से भरी, सफल और सम्मानित।
बीच के एक साधारण से स्लीपर क्लास में प्रेमचन्द खिड़की से बाहर देख रहा था।
उसके हाथ खुरदरे और मजबूत थे, जो ज़मीन से उसके गहरे रिश्ते की गवाही दे रहे थे। वह अपने गाँव लौट रहा था। उसकी दुनिया थी - खेतों की हरियाली, मौसम का मिजाज, और फसल की उम्मीद। उसकी ज़िंदगी में पैसों की चकाचौंध नहीं थी, लेकिन सुकून था। सुबह चिड़ियों की चहचहाहट से जागना, दिन भर अपनी मिट्टी की सेवा करना और शाम को चौपाल पर दोस्तों के साथ बैठना, उसे इसी में जन्नत मिलती थी। उसने शहर के लोगों की भाग-दौड़ देखी थी और सोचा था, "क्या फायदा ऐसी कमाई का, जो रात की नींद और दिन का चैन ही छीन ले?" उसे यकीन था कि उसकी ज़िंदगी, प्रकृति से जुड़ी यह सादगी भरी ज़िंदगी ही सबसे अच्छी है।
और आखिर में, दरवाज़े के पास बैठा धन्नजय अपना डायरी में कुछ स्केच बना रहा था।
वह एक कलाकार था। उसका दुनिया था - रंग, कैनवास, और कल्पना की उड़ान। उसके पास न तो जयचंद्र जैसा बैंक बैलेंस था, न ही प्रेमचन्द जैसी ज़मीन। कभी-कभी महीनों तक उसकी कोई पेंटिंग नहीं बिकता था, लेकिन जब वह अपना कला में डूबता, तो उसे दुनिया की कोई फिक्र नहीं रहता। समंदर किनारे बैठकर लहरों को देखना, बिना किसी योजना के किसी भी अनजान शहर में घूमने निकल जाना, यही उसका आज़ादी था। वह सोचता था, "नौ से पांच की नौकरी या खेत की मेहनत, ये तो एक पिंजरे जैसा है। ज़िंदगी तो वो है, जिसमें हर पल अपनी मर्ज़ी से जिया जाए।" उसे पूरा विश्वास था कि उसका यह फकीराना, रचनात्मक ज़िंदगी ही दुनिया में सबसे बेहतर है।
सफर खत्म हुआ। ट्रेन अपनी-अपनी मंजिल पर रुकी और तीनों मुसाफिर उतर गए।
जयचंद्र अपने शहर लौटा और अगली सुबह एक बड़ी मीटिंग की तैयारी में जुट गया। एक सफल प्रेजेंटेशन के बाद तालियों की गड़गड़ाहट सुनकर उसे लगा, " हाँ, यही है मेरी दुनिया! सबसे अच्छी! "
प्रेमचन्द अपने गाँव की मिट्टी में पैर रखते ही एक गहरी सांस ली। खेतों की सौंधी महक ने उसकी सारी थकान मिटा दी। उसने मुस्कुराते हुए सोचा, " इससे बेहतर और क्या हो सकता है? मेरी जमीन, मेरा आसमान! सबसे अच्छा! "
धन्नजय एक शांत पहाड़ी कस्बे में उतरा। उसने अपना कैनवास निकाला और सामने दिख रहे खूबसूरत सूर्यास्त को रंगों में कैद करने लगा। उस पल में उसे जो खुशी मिला, उसने कहा, " यही तो है असली जीवन! सबसे अच्छा! "
तीनों की ज़िंदगी एक दूसरे से बिल्कुल अलग था, तीनों के सुख-दुख के पैमाने अलग थे। किसी को दूसरे की ज़िंदगी बेहतर नहीं लगी, क्योंकि हर किसी के लिए उसकी अपनी ज़िंदगी ही उसकी "माँ" जैसी थी।
जैसे दुनिया में माँ किसी की भी हो, कैसी भी हो, पर हर बच्चे को लगता है कि " मेरी माँ सबसे अच्छी है। "
ठीक वैसे ही, ज़िंदगी चाहे जैसी भी हो, मुश्किल हो या आसान, हर इंसान को यही लगता है कि " मेरी ज़िंदगी ही सबसे अच्छी है। "
और शायद यही यकीन हमें जीने का हौसला देता है।
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जयचंद्र मेहता की ओर से एक संदेश, उनकी कहानी "ज़िंदगी माँ जैसी" को पढ़ने के लिए धन्यवाद के साथ साथ:
प्रिय पाठकों,
मेरा पहला प्रयास, कहानी "ज़िंदगी माँ जैसी" को पढ़ने और अपना बहुमूल्य समय देने के लिए मैं आप सभी का तहे दिल से आभारी हूँ।
इस कहानी के माध्यम से मेरा प्रयास बस इतना था कि हम जीवन की आपाधापी में उन अनमोल रिश्तों को न भूलें जो हमारी नींव हैं। माँ का प्रेम और त्याग निःस्वार्थ होता है, और मेरा मानना है कि ज़िंदगी भी हमें माँ की तरह ही बेशुमार मौके देती है, हमें संभालती है और हर ठोकर के बाद फिर से खड़ा होना सिखाती है।
अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो, तो कृपया इसे लाइक, शेयर और इस पर अपने विचार कमेंट में ज़रूर व्यक्त करें। आपका समर्थन ही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है।
एक बार फिर, आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।
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जय प्रेम धन की ओर से एक संदेश..........
यह एक लेखक के तौर पर पहले कदम के लिए एक बेहतरीन शुरुआत है। मैं आपको आपके लेखन के सफ़र के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ।
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